
गोपेश्वर। जिले की पुरसाड़ी जेल में कैदियों की मेहनत रंग लाई है। कभी पानी की बूंद-बूंद के लिए तरसते कैदियों के लिए आज पानी की कमी नहीं है। यहां कैदियों ने नंदप्रयाग गदेरे से करीब दो सौ मीटर भूमिगत नहर का निर्माण कर जेल परिसर में पानी पहुंचाया है। पानी के संरक्षण के लिए परिसर में दस हजार लीटर का स्टोर टैंक भी बनाया गया है। अब पानी के लिए जेल प्रशासन को दो किमी दूर पुरसाड़ी गांव और अलकनंदा नदी में नहीं जाना पड़ता है।
बदरीनाथ हाईवे पर नंदप्रयाग में स्थित पुरसाड़ी जेल में वर्तमान में जेल में 41 कैदी मौजूद हैं। कैदियों ने 17 दिनों में पेयजल लाइन का निर्माण पूरा किया है। जेल प्रशासन ने कैदियों के इसके लिए मेहनताना भी दिया गया।
बंजर भूमि को खोदकर उगाई सब्जी
जेल परिसर में पानी आने से कैदियों ने यहां बंजर भूमि को खोदकर क्यारियों का निर्माण किया है। जिसमें राई, मूली, प्याज, पालक, बंद गोभी, फूल गोभी, लहसून आदि का उत्पादन किया है। कैदियों में एक महिला भी है। जो दिनभर सब्जी की निराई, गुड़ाई और सिंचाई में लगी रहती हैं।
केवल आठ हजार आया खर्च
पुरसाड़ी जेल में कैदियों ने करीब दो सौ मीटर पेजयल योजना का निर्माण किया। इस पर तीन इंच के पाइप लगे हैं। जेल प्रशासन की मानें तो इस पर मात्र आठ हजार रुपये खर्चा आया। जल निगम या अन्य किसी कार्यदायी संस्था से तीन इंच की दो सौ मीटर पेयजल लाइन के निर्माण में करीब एक लाख बीस हजार रुपये का खर्च आ जाता है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता जेपी जोशी का कहना है कि ढुलान, खुदान और पाइपों पर खर्च अधिक होता है।
कोट-
जेल में पेयजल की समस्या इतनी बढ़ गई थी कि दो किमी दूर से पानी ढोना पड़ता था। जल संस्थान की पेयजल लाइन भी वर्ष 2011 में आपदा से क्षतिग्रस्त हो गई थी। इस बार कैदियों ने एकजुटता दिखाकर नंदप्रयाग गदेरे से पेयजल लाइन का निर्माण किया। अब जेल में पानी की कमी नहीं है।
